IoT क्या है और कैसे काम करता है?

आपने आजकल एक नया टर्म सुना होगाIoT, आज मैं आपको IoT क्या है (What is IoT in hindi) इसी के बारे में बताने जा रहा हूँ।

अंग्रजी फिल्मों में, खासकर science fiction फिल्मों में उस संसार की कल्पना की गई है जहां हर चीज एक-दूसरे से कम्यूनेट करती हो। आज वह कल्पना धीरे-धीरे हकीकत का रुप लेती जा रही हैं। आज ऐसी कारे मौजूद हैं जो खुद ही ड्राईव करती है खुद ही रास्ते का पता लगाती हैं। किसी इंसानी ड्राइवर से बेहतर कारें खुद ही ड्राइव कर सकती हैं। एक तरह से सोचे तो वह ऐसी मशीन बन गई हैं जो सोच सकती हैं। यह IoT पर आधारित है ।

आज सूचना प्रौद्योगिकी उस बिन्दु पर पुहँच गई हैं जहां लगता है कि हर कल्पना का साकार होना मात्र कुछ दिनों की बात लगती है लेकिन जब इन्टरनेट की शुरुआत हुई थी तब इसकी विकास की गई काफी धीमी थी। लेकिन हाल के वर्षों में इसकी गति इतनी थी कि एक आम आदमी के लिए उससे सांमजस्य बैठाना मुश्किल सा हो गया है। नित्य नयी तकनीक से हमारा सामना होता है जो कभी हमनें फिल्मों में मात्र कल्पना की उड़ान समझ कर हंसा होगा आज वह हकीकत में तब्दील हो रही है।

अस्सी के दसक में मोबाइल एक कल्पना मात्र ही थी। लेकिन आज हर किसी के जीवन का हिस्सा बन गई हैं। आज मोबाइल इन्टरनेट के प्रसार की सबसे बड़ी कारक साबित हुई है। साथ ही ऐसे उपकण सामने आए जो इन्टरनेट इनबिल्ट थे। जैसे- स्मार्ट वाॅच, स्मार्ट टीवी इत्यादि। लेकिन ये IoT कन्सेप्ट के तहत नहीं आती हैं।

IoT का फुलफाॅर्म (Fullform oF IoT)

इसका फुलफाॅर्म Internet of Things होता है।

IoT क्या है कन्सेप्ट ?

IoT क्या है, यह वह कन्सेप्ट या सोच है जिसके तहत वह उपकरण जो इन्टरनेट से कनेक्टेड हैं एक-दूसरे को पहचानती हो और डाटा का आदान-प्रदान करती हों वह भी किसी इंसानी मदद या दखल के। या साधारण शब्दों कहें तो वह एक-दूसरे से बातचीत करती हो। इसमें वो वस्तुए शामिल हैं जिनमें कम्प्यूटर या मोबाइल की तरह स्क्रीन नहीं है।

IoT क्या है?

इस विचार का जन्म 1982 में कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के एक लैब में हुआ था।जब वहाँ सबसे पहले एक कोक मशीन को इंटरनेट से जोड़ा था। यह मशीन अपने भीतर रखे गए कोक की बोतलों की संख्या का हिसाब रख सकती थी और उनके तापमान को माप लेती थी।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स शब्द 1999 में केविन एश्टन ऑफ प्रॉक्टर एंड गैंबल द्वारा गया नाम है।

आसानी और सूहुलियत

यह हमारे जीवन को कैस आसान बना सकता है। उदाहरण के लिए ऐसे ओवन की कल्पना कर सकते है जो खाना बन जाने पर खुद ही स्वीच आॅफ हो जाए। या फिर उस गेट की कल्पना करे जो आपके आने पर खुद खुल जाए और अजनबियों के आने पर आप को आगाह करे और साथ ही यह पूछे कि गेट खोलना है या नहीं। ऐसी चीजें हमारे जीवन को जरुर सरल बनाऐगी।

ऐसी कुछ चीजें बन भी गई। जैसे कारें जो स्वंय ड्राइव करती है। आज मोबाइल ऐप्प के जरीये एसी को स्वीच आॅन या आॅफ कर सकते हैं। इसी प्रकारकुछ पंखे और लाइट बल्ब को मोबाइल एप्प से आॅन-आॅप कर सकते हैं।

IoT कुछ प्राडोक्ट के उदाहरण-

1. Amazon Echo Plus Voice Controller

यह अलेक्सा वोइस असिस्टेंट की मदद से यूजर से बात करता है और अलग-अलग की सेवाएँ देता है जैसे-मौसम की जानकारी देना, स्पोट(Sport) संम्बधी जानकारी देना, गाने बजाना आदि। यह फोन काॅल कर सकता है या ले सकता है। यह स्मार्ट डिवाइस जैसे पंखे, बल्ब को कंट्रोल कर सकता है।

2.Google Home Voice Controller

यह गाने बजा सकता है। यह आपके टीवी और स्पीकर के साउड को कंट्रोल कर सकता हैं। यह अलार्म और टाइमर को कंट्रोल कर सकता है और स्मार्ट डिवाइस को आॅफ और आॅन कर सकता है

3.Amazon Dash Button

यह एक उपकरण है जो इंटरनेट वाई-फाई से जुड़ा होता है और यह सुनिश्चित करता है कि उपयोगकर्ता किराने की सामग्री, चिकित्सा और व्यक्तिगत देखभाल, बच्चों और किसी भी पालतू जानवरों की वस्तुओं जैसे महत्वपूर्ण घरेलू वस्तुओं की कमी न हो।

यदि आप उपयोगकर्ता हैं और डैश बटन का पूरी तरह से उपयोग करना चाहते हैं तो आपको को अमेज़ॅन प्राइम सदस्य होना चाहिए।

4.August Doorbell Cam

यह आप कहीं भी हों अपने दरवाजे पर आने वाले लोगो की विडियो आपके मोबाइल पर दिखाता है। यह आपके दरवाजों पर नजर रखता है और आपके दरवाजे की गति में बदलाव को भी दिखाता है।

5.August Smart Lock

यह August company का ही दूसरा Product है। यह उपयोगकर्ता को सुहुलियत देता है कि आप किसी भी जगह से आप अपने घर को लाॅक या अनलाॅक कर सकते है और घर आने वाले को भीतर आने दे सकते है और अनचाहे मेहमान के लिए घर लाॅक कर सकते हैं।

6.Footbot Air Quality Monitor

एक विश्वसनीय उपकरण है जो इनडोर प्रदूषण को मापने में मददगार है और घरोंकार्यस्थल और इनडोर सार्वजनिक स्थानों में वायु की गुणवत्ता में सुधार लाता है। यह अक्सर सटीक परिणाम देता है।

7.Kuri Mobile Robot

यह एक प्रकार का राबोट है। इसे विशेष रूप से परिवार के मनोरंजन के लिए बनाया गया है। कुरी उपयोगकर्ताओं के साथ बातचीत करता है उनके लिए नाच सकता है और गा सकता है। वह घर के सदस्यों की विडियो भी बना सकता है

8.Nest Smoke Alarm

यह एक तरह का स्मोक डिडेकटर है जो घर में आग लग जाने पर उसके स्मोक का पता लगा कर आपके मोबाइल में ऐलर्ट भेजता है।

9.Flow by Plume Labs Air Pollution Monitor

यह एक पोर्टेबल डिवाइस है जो हवा की गुणवत्ताको मापता है इसका ऐप्प आपको हवा की गुणवत्ताके बारे में आगह करता है। आप घर के अन्दर या घर के बाहर किसी भी जगह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

10.Belkin WeMo Smart Light Switch

यह उपयोगकर्ता को दीवार या अपने मोबाइल से या अपनी आवाज का उपयोग करके आपके घर की रोशनी का प्रबंधन करने में मदद करता है। यह स्मार्ट लाइट स्विच आपकी रोशनी का वायरलेस एक्सेस देने के लिए आपके मौजूदा होम वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ता रहता है जिसमें कोई सब्सक्रिप्शन या हब की आवश्यकता नहीं होती है।

IoT कैसे काम करता है?( How IoT works?)

आप ने यह तो जान लिया है IoT क्या है लेकिन यह काम कैसे काम करता है।

IoT में चार कम्पोनेन्ट होते हैं। जो किसी भी काम को आटोमेडेट तरीखे से सम्पन्न के लिए जरुरी हैं। जो इस प्रकार हैं-

1.सेन्सर– सेन्सर अपने चारों ओर मौजूद परिवेश से डाटा एकत्र करती हैं। डाटा बहुत छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी, जैसे किसी होटल का ज्योग्राफिल लोकेशन या किसी दुर्घटना का विडियो।

एक डिवाइस में अलग-अलग डाटा लेने के लिए अलग अगल तरह के सेन्सर लगे हो सकते हैं। जैसे- एक मोबाइल में जीपीएस, कमैरा, कसेलोरोमीटर ।

इस तरह एक सेन्सर या डिवाइस में मौजूद एक से अधिक सेन्सर अपने चारों ओर मौजूद परिवेश से डाटा एकत्र करती हैं।

2.कनेक्टिविटी– एक बार जब डाटा एकत्र हो जाता है तो उसे क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में ट्रांसफर कर दिया जाता है। पर डाटा ट्रांसफर के लिए माध्यम की जरुर होती है। ऐसे समय में काम आते हैं, डाटा ट्रांसफर के माघ्यम, जैसे-वाई-पाई, ब्लूटथ, सेसुलर नेटवर्क आदि।

सुरक्षा कितना इफेक्टिव होगी यह के उपलब्धता और गति पर निर्भर करती है।

3.डाटा प्रोसेसिंग– डाटा के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में पहँचने के बाद उस डाटा को एनालाइसिस किया जाता है यह IoT का सबसे कठिन भाग होता है।

एनालाइसिस कठिन भी हो सकता है और आसान भी। जैसे किसी अनजान आदमी की पहचान करना एक कठिन काम होता है और किसी जगह का लोकेशन पता करना आसान होता है ।

4.इन्टरफेस– अब इसके बाद बारी आती है सबसे अंतिम हिस्से की। इसमें यूजर को नोटीफिकेशन या अलर्ट के माध्यम से बताया जाता है कि आपके द्वारा दिया गया आदेश पूरा कर लिया गया। यहIoTमोबाइल एप्प के जरीये किया जाता है ।

लेकिन यह जितना आसान दिखता है उतना नहीं है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आईओटी प्लेटफ़ॉर्म क्या है और तकनीक कैसे विकसित की गई है। ऐसे सिस्टम की जरुर होती है जो किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में उसे मेन्युअली ठीक किया जा सकें। जैसे अगर एसी रुम के तापमान को सही से कम या ज्यादा कर पा रहा हो तो उसे मेन्युअली ठीक किया जाए।

IoT के फायदें

इसके फायदें कुछ इस प्रकार हैं-

1. सहुलियत- जब मशीनें खुद-ब-खुद काम करेंगी तो यह जाहिर है कि यह हमारे जीवन को आरामदेह बनाएगी। अगर कार को ड्राइव करने लिए किसी इंसान की जरुर नहीं होगी तो आराम से सोते हुए यात्रा पर जा सकते हैं। इसी प्रकार यदि ओवन खाना बन जाने पर यदि खुद-ब-खुद बन्द हो जाए तो हमें खाने जल जाने का डर नहीं रहेगा।

2. कार्यकुशलता और सुरक्षा- कई जगह ऐसे काम होते जहाँ कार्यकुशल लोगों की जरुर होती है मगर यहाँ सुरक्षा भी एक बड़ा सवाल होता है। ऐसी जगहों पर आप आटोमेटेड मशीन को रख सकते है जो कुशलतापूर्वक उस काम को कर सकती है और किसी भी प्रकार के दुर्घटना होने पर केवल मशीन को ही हानि होगी और मानव जीवन बच जाएगा।

3.समय की बचत- जब मशीनें आटोमेटेड होगी तब काम भी जल्दी होगा क्योंकि मशीनें खुद ही पता लगा लेगी कि क्या काम बाकी है इस प्रकार जो वक्त मशीनों को चलाने में जाया हो जाता था वह अब नहीं होगा।

IoT के नुकसान

1. प्राइवेसी का न रहना- जब हजारों या लाखों मशीनें या डिवाइस आपस में जुड़ी होगी और डाटा का आदान-प्रदान करेगी तो डाटा की प्राइवेसी को बनाए रखना एक चुनौती साबित होगी। आप क्या खाना पसन्द करते है, किसी वक्त क्या काम कर रहे है, यह सभी को पता हो सकती है। जो आपके निजता का मामला है।

2. सुरक्षा- जब हर डिवाइस आपस में जुड़ी होगी तब ऐसा डाटा बाहर आ सकता है जो आपके सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर सकता है जैसे अगर मशीन खुद ही आपके जरुर की चीजें खरीदने लगें और पेमेन्ट भी खुद करें तो हो सकता है कि आपके बैंक की सारी डिटेल इन्टरनेट पर उपलब्ध हो जाए इसके बाद आप सोच सकते कि आगे क्या होगा।

आशा कि मैं आपको IoT क्या है यह समझा पाया हूँ। आपने यह भी जान होगा कि इसके जरीये दुनिया में आगे क्या बदलाव आने वाले हैं।

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